पेड़ का दर्द (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)
 




 
आज हम कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता पेड़ का दर्द पाठ समझने वाले हैं। साथ ही साथ हम इस पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों को अच्छी तरह समझेंगे। यदि आपने पेड़ का दर्द पाठ को पहले नहीं पढ़ा और यदि आपका इस ब्लॉग पर पहली बार आए हैं तो आपका स्वागत है। पाठ को बहुत ही आसान शब्दों में @schooldiary1200 यूट्यूब चैनल पर समझाया गया है। तो पाठ को समझने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पहले इस वीडियो को पूरा देख ले और उसके बाद नोट्स के लिए यहाँ पर वापस आए। 
 
 अगर आप इस पाठ को पहले ही पढ़ चुके हैं या वीडियो को समझ चुके हैं तो फिर हम डायरेक्ट शुरू कर सकते हैं। 
पहले शुरू करते हैं कविता पाठ से - 
                     पेड़ का दर्द (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)
 कुछ धुआँ,
 कुछ लपटें
कुछ कोयले
कुछ राख़ छोड़ता
चूल्हे में लकड़ी की तरह मैं जल रहा हूँ
मुझे जंगल की याद मत दिलाओ
 

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                                                 हरे भरे जंगल की
                                                 जिसमें मैं संपूर्ण खड़ा था
                                                 चिड़िया मुझ पर बैठ चहचहाती थीं 
                                                 धामिन मुझसे लिपटी रहती थी
                                                और गुलदार उछल कर मुझ पर
                                                 बैठ जाता था ।
 
 जंगल की याद
 अब उनको पहाड़ियों की याद रह गई है
 जो मुझ पर चली थीं
 उन आरो की जिन्होंने
 मेरे टुकड़े-टुकड़े किए थे
 मेरी संपूर्णता मुझसे छीन ली थी । 
 चूल्हे में
 लकड़ी की तरह अब मैं जल रहा हूँ
 बिना यह जाने, कि  जो हाँड़ी चढ़ी है
 उसकी खुद झूठी है
 या उसे किसी का पेट भरेगा
 आत्मा तृप्त होगी ।
 बिना यह जाने
                                                  की जो चेहरे मेरे सामने हैं
                                                  वे मेरी आँच से
                                                  तमतमा रहे हैं
                                                  या गुस्से से,
                                                  वे मुझे उठा कर चल पड़ेंगे
                                                  या मुझ पर पानी डाल सो जाएँगे
                                                  जंगल की याद मुझे मत दिलाओ । 
 एक-एक चिनगारी
 जलती पत्तियां हैं
 जिनसे अब भी मैं चूम लेना चाहता हूँ 
 इस धरती को
 जिसमें मेरी जड़ें थी । 
 
 
 
इस कविता में बहुत सारे प्रश्न बनेंगे
कक्षा 9 के किताब में एक बात है कि आपको पाठ के पीछे कोई भी प्रश्न आपको अभ्यास हेतु नहीं मिलेगा। तो समस्या यह है कि यहां पर प्रश्नों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। कहने का मतलब है कि हर एक लाइन से भी प्रश्न बन सकते हैं तो आपको उसके लिए तैयार रहना चाहिए। क्वेश्चन पेपर के पैटर्न के अनुसार जो पहले फॉर्मेट है क्वेश्चन का वह ऑब्जेक्टिव का होता है यानी MCQ का आपको चार ऑप्शन या तीन ऑप्शन दिए रहेंगे उसमें से सही जो जवाब है आपको ढूँढना पड़ता है। 
तो शुरुआत करते हैं-  
अब आते हैं एक नंबर के प्रश्न की ओर आपके यहां पर उसके उत्तर भी मिलेंगे तो परेशान होने की जरूरत नहीं है प्रश्न मारे एक पेड़ का दर्द किसकी रचना है नंबर दो उत्तर है सर्वेश्वर दयाल सक्सेना पेड़ का दर्द किस विधा की रचना है कविता पेड़ का दर्द कविता में किसकी बात की गई है पेड़ के काटने की पेड़ का दर्द कविता का मूल विषय वस्तु क्या है पेड़ों का काटना या डिफोरेस्टेशन पेड़ के जलते समय वह किन-किन स्थितियों से गुजरता है यह बड़ा प्रश्न हो गया उसको बाद में लिखेंगे अगला प्रश्न चूल्हे में लकड़ी की तरह कौन जल रहा है उत्तर है चूल्हे में लकड़ी की तरह कभी जल रहा है या पेड़ जल रहा है या लकड़ी जल रही है आप इसमें से जिस भी प्रश्न का उत्तर देंगे वह सही माना जाएगा बढ़िया है पेड़ का इस्तेमाल करें जंगल की याद ना दिलाने के लिए कौन कहता है जंगल की याद ना दिलाने के लिए कवि कहता है या पेड़ करता है पेड़ कहां खड़ा था पेड़ जंगल में खड़ा था संपूर्ण था का क्या अर्थ है संपूर्णता का अर्थ मां की उसे अवस्था से हैं जब व्यक्ति यह समझता है की उससे उसे पर कई लोग निर्भर हैं और वह एक अभिभावक की हैसियत से जी रहा है ऐसी अवस्था में यह लगा की यदि मैं ना रहूं तो इनका क्या होगा और यह महसूस करना ही संपूर्णता है क्योंकि व्यक्ति इसमें संतुष्टि का अनुभव करता है धामिन का क्या अर्थ है या धामिन किसे कहते हैं उत्तर धामिन एक सांप की प्रजाति का नाम है गुलदार किसे कहते हैं या गुलदार क्या होता है उत्तर गुलदार चीते की प्रजाति है गुलदार कहां बैठ जाता था गुलदार पेड़ पर उछाल कर बैठ जाता था किस जंगल की याद अब कुलहड़ियों की याद रह गई है कवि को जंगल की याद आ कुलहड़ियों की याद रह गई आप इससे कई के बजाय पेड़ भी कर सकते हैं या नहीं पेड़ को जंगल की याद के बजाय अब कुलहड़ियों की याद आती है पेड़ों को पेड़ को पेड़ के किसने टुकड़े टुकड़े किए थे पेड़ के हरि ने टुकड़े-टुकड़े किए थे संपूर्णता चीन का क्या अर्थ है संपूर्ण नेता चीन का अर्थ पेड़ को उसकी अपनी स्थिति से हटा देना या उसकी वर्तमान स्थिति से गिरा देना है चूल्हे में लकड़ी की तरफ कौन जल रहा है कभी पेड़ लकड़ी चूल्हे में लकड़ी की तरह पेड़ जल रहा है अगर आप पेड़ की जगह कभी लिखते हैं तो भी सही रहेगा कभी यह क्यों कहता है की जो हांडी चढ़ी है उसकी खुद झूठी है कभी इसलिए ऐसा करता है क्योंकि उसे पता है की हांडी पर की हांडी में किसी भी प्रकार का अनाज नहीं है और किसी को झूठा दिलासा देने के लिए लकड़ी जलाई जा रहे हैं चूल्हा जलाया जा रहा है या नहीं इस इस हांडी के खोलने से इस  हांडी के पानी के खोलने से किसी की भूख नहीं मिटने वाली आत्मा तृप्त होने का क्या अर्थ है आत्मा तृप्त होने का अर्थ पेट भरकर खाने से है जब व्यक्ति पेट भरकर का पता है जब व्यक्ति पेट भर कर का पता है तब उसकी आत्मा तृप्ति होती है और मां संतुष्टि से भर जाता है जो चेहरे मेरे सामने है वह मेरी आंख से तमतमा रहे हैं या गुस्से से कवि किन की बात कर रहा है कभी मजदूरों की बात कर रहा है जो आगे के सामने बैठकर यह सोच रहे हैं कि आज की इस मसाज से अमीरों की हवेली जला दी जाए या उससे बुझा कर अपने गुस्से को दबा लिया जाए कभी पेड़ जंगल की याद ना दिलाने के लिए क्यों कहता है पेड़ क्योंकि आज से पहले जब भी वह जंगल को याद करता था तब उसके मन में जंगल की अच्छी-अच्छी यादें आती थी लेकिन अब पेड़ से लकड़ी में बदलने के बाद यानी टुकड़े-टुकड़े हो जाने के बाद अब जंगल की याद उसके लिए दुख भरी हो गई है क्योंकि जहां वह संपूर्णता से खड़ा था आज वह अपना अस्तित्व खोकर लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों में बढ़ चुका है और अपनी सार्थकता को चुका है और इसकी इस अवस्था के पीछे के पीछे मानव के स्वार्थी मानव के अलावा उसके हथियार कुल्हाड़ी और आदि हैं बुरी यादें उसके मन पर इस कदर छा गई हैं की अब जंगल की अच्छी सुंदर यादें उसके जहां में नहीं आती कवि के अनुसार धरती पत्तियां कैसी दिखती हैं कवि के अनुसार धरती पत्तियां चिंगारियां की तरह दिखती हैं पेड़ धरती को क्यों चूमना चाहता है पेड़ धरती को इसलिए चूमना चाहता है क्योंकि वह अपनी धरती मां के प्रति कृतज्ञ है जिसने उसे बी से पाल पॉस्कर इतना बड़ा किया उसे इतना सामर्थ बनाया की वह दूसरे प्राणियों का सहारा बन सका उसके मन में अपने लिए आत्मविश्वास का अनुभव हुआ उसे संतुष्टि का अनुभव हुआ इसलिए वह अपने धरती मां के प्रति कृतज्ञता है